Jalore Ke Chauhan Ka Itihas

Jalore Ke Chauhan Ka Itihas

Jalore Ke Chauhan Ka Itihas | जालौर के चौहान का इतिहास

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जालौर के चौहान का इतिहास | History of Chauhan of Jalore

वंश:- सोनगरा चौहान

सस्थापक:- कीर्तिपाल (कीतू) चौहान

कीर्तिपाल को उपाधि:- ‘कीतू’ एक महान राजा (मुहणौत नैणसी द्वारा)

स्थापना:- 1181 ई.

अंतिम नेरश:- कान्हड़दे चौहान

कान्हड़दे चौहान के बारे में | About Kanharde Chauhan:-

शासनकाल:- 1305 ई. -1311 ई. तक

स्त्रोत:- कान्हड़दे प्रबन्ध (पदमनाभ द्वारा रचित)

पिता:- सामन्त सिंह

पुत्र:- वीरमदेव – शहजादी फिरोजा (अलाउद्दीन खिलजी की पुत्री) से प्रेम प्रसंग (कान्हड़दे प्रबन्ध एंव नैणसी री ख्यात के अनुसार) वीरमदेव द्वारा विवाह प्रस्ताव ठुकराने पर अलाउद्दीन खिलजी द्वारा गुलविहिशत नामक महिला के नेतृत्व में जालौर पर तुर्क सेना हमले के लिए भेजी गई | जिसमे कान्हड़दे व वीरमदेव मारे गये |

फिरोजा द्वारा दिल्ली में वीरमदेव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर स्वय भी यमुना में कूद जान दे दी |

(कान्हड़दे प्रबन्ध एंव नैणसी री ख्यात के अनुसार)

अलाउद्दीन खिलजी से संघर्ष का एतिहासिक कारण:-

गुजरात अभियान से लौटी विजयी तुर्क सेना के शिविर पर कान्हड़दे का हमला |

अलाउद्दीन खिलजी का 1308 ई. में सिवाणा दुर्ग पर हमला:-

दुर्ग रक्षक ‘शीतलदेव चौहान’ को मार दिया गया |

भावला पंवार नामक देशद्रोही ने अलाउद्दीन खिलजी को भांडेलाव जलाशय का भेद बताया गया (जिसका जल दुर्गवासी पीते थे), अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा उसमे गौ-रक्त मिला दिया गया |

सिवाणा सेनानायक ‘वीर सातल-सोम’ ने तुर्क सेना से डटकर मुकाबला किया |

दुर्ग में महिलाओं द्वारा ‘जौहर’ भी किया गया |

अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनापति ‘कमालुद्दीन गुर्ग’ को सिवाणा दुर्ग का रक्षक नियुक्त किया |

अलाउद्दीन खिलजी ने ‘सिवाणा दुर्ग’ का नाम बदल कर ‘खैराबाद’ रखा |

अलाउद्दीन खिलजी का जालौर दुर्ग पर 1311 ई. में हमला:-

इस युद्ध में कान्हड़दे चौहान लड़ते लड़ते वीरगती को प्राप्त हो गया |

दहिया बीका राजपूत – ये देशद्रोही राजपूत इसकी पत्नी हीरान्दे द्वारा इसकी हत्या कर दी गई |

तीन दिन बाद में वीरमदेव द्वारा स्वय को कटार घोपकर आत्महत्या कर ली |

अलाउद्दीन खिलजी ने ‘जालौर दुर्ग’ का नाम बदलकर ‘जलालाबाद’ रख दिया |

अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा दुर्ग में “तोपखाने को मस्जिद” का निर्माण करवाया गया |

कान्हड़दे चौहान के भाई “मालदेव मूँछाला” ने अलाउद्दीन खिलजी की अधीनता को स्वीकार किया |

जालौर दुर्ग के बारे में | About Jalore Fort:-

निर्माता:- नागभट्ट प्रथम प्रतिहार शासक

श्रेणी:- गिरी पर्वत

स्थिति:- जालौर

अन्य नाम:- सोनगढ़/ सोनलगढ़ (स्वर्णगिरी/ कनकाचल पहाड़ी पर स्थित), जलालाबाद (1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा इसका नाम रखा गया)

विशेषता:- जोधपुर नरेशों का राजकोष स्थल था |

प्रसिद्धि:-

‘आभ फटे, घर उलटे, कटें बगतरा कोर |

सीस पड़ै, धड़ फड़े, जद छुटे जालौर ||’

जोधपुर उत्तराधिकारी मानसिंह द्वारा अपने ज्येष्ठ भ्राता एंव जोधपुर महाराजा भीमसिंह को बोला गया |

हसन निजामी के अनुसार – कभी किसी विजेता के लिए यहाँ के द्वारा कभी नही खोले गये |

प्रमुख स्मारक:- संत मल्लिकाशाह की दरगाह, परमार कालीन कीर्ति स्तम्भ

सिवाणा दुर्ग के बारे में | About Sivana Durg:-

निर्माता:- वीर नारायण पंवार

श्रेणी:- गिरी पर्वत की

स्थिति:- बाड़मेर

अन्य नाम:- खैराबाद (अलाउद्दीन खिलजी द्वारा 1308 ई. में)

प्रसिद्धि:- ‘मारवाड़ की संकटकालीन राजधानी’

प्रसिद्ध तालाब:- भाड़ेलाव

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