Ranthambore Ke Chauhan ka Itihaas

Ranthambore Ke Chauhan ka Itihaas

रणथम्भौर के चौहान का इतिहास | Ranthambore Ke Chauhan ka Itihaas

Rajasthan, Clerk, Patwari, Gramsevak, B.ed,Bstc, all exams etc सभी प्रकार की सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले सभी विधाथीयो के लिए राजस्थान के इतिहास के सभी टॉपिक पूर्ण व्याख्या के साथ हमारी वेबसाइट में उपलब्ध कराये जाते है |

Ranthambore Ke Chauhan ka Itihaas | रणथम्भौर के चौहान का इतिहास

रणथम्भौर के चौहान का इतिहास | History of Chauhan of Ranthambore:-

वंश:- चौहान

संस्थापक:- गोविन्दराज चौहान

पिता:- पृथ्वीराज चौहान

स्थापना:- 1194 ई.

तुर्क अधिकार:-

1226 ई. में दिल्ली सुल्तान इल्तुतमिश ने रणथम्भौर ‘नरेश वाल्हण’ (वल्लन) से रणथम्भौर को छीन लिया |

रणथम्भौर ‘नरेश वाग्भट्ट’ (वराहदेव) ने दिल्ली सुल्तान रजिया से रणथम्भौर को छीन लिया |

रणथम्भौर नरेश वाग्भट्ट के काल में बलबन का 1248 ई., 1253 ई., एंव 1258 ई. – 1259 ई., में आक्रमण हुआ |

अंतिम नरेश:-हम्मीरदेव चौहान

हम्मीरदेव चौहान के बारे में | About Hammir Dev Chauhan:-

शासनकाल:- 1282 ई. – 1301 ई.

पिता:- जैत्रसिंह चौहान

माता:- हीरा देवी

पत्नी:- महारानी रंगदेवी

पुत्री:- देवल दे

उपाधियाँ:-

‘हठी शासक’ के लिए दोहा:-

‘सिंह सवन सत्तपुरुष वचन, कदलन फलत इक बार |

तिरिया तेल, हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार ||’

हम्मीरदेव को ‘16 युद्धो का विजेता’ कहा गया है |

अन्य उपाधि ‘शाकम्भरी नरेश’ (आचार्य ब्रहस्पति द्वारा)

स्त्रोत:-

हम्मीर महाकाव्य (नयनचन्द्र सूरी)

हम्मीर बंधन (अमृत कैलाश)

हम्मीर रासौ (जोधराज कृत)

हम्मीर हठ (चंद्रशेखर)

गुरु:- राघवदेव

आश्रित कवि:- विजयादित्य

स्वरचित संगीत ग्रन्थ:- श्रृंगार हार

निर्माणकार्य:-

‘32 खम्भो की छतरी’ – पिता ‘जैत्रसिंह’ के बत्तीस वर्षीय शासनकाल की स्मृति में रणथम्भौर दुर्ग में निर्मित करवाई |

जलालुद्दीन फिरोज खिलजी का आक्रमण:- 1291 ई. में

गुरुदास सेनी से झाईना दुर्ग जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने छीन लिया |

लेकिन बाद में हम्मीर देव ने जलालुद्दीन फिरोज खिलजी को हरा दिया |

अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण:- 1300 ई. में

तुर्क सेनापति – उलुग खाँ, अलप खाँ एंव नुसरत खाँ

कारण – हम्मीर देव द्वारा निम् तुर्क भगौड़े सैनिको को शरण देना |

मीरमुहम्मद शाह (अलाउद्दीन खिलजी की मराठा बेगम चिमना बाई का प्रेमी)

अन्य सैनिको को शरण – कह्ब्रू, कमरू, बारबक

हिन्दुवातघाटी युद्ध:- 1300 ई. में इस युद्ध में अलाउद्दीन खिलजी का सेनापति नुसरत खाँ मारा गया |

अलाउद्दीन खिलजी द्वारा रणथम्भौर दुर्ग की घेराबंदी के लिए स्वंय ही उपस्थित होना – 1301 ई.

देशद्रोही राजपूत – रतिपाल (हम्मीरदेव का सेनानायक)

रणमल – (रणथम्भौर दुर्ग का रक्षक)

सुरजन शाह – (अन्न भण्डार रक्षक)

“राजस्थान का प्रथम साका”:- 11 जुलाई 1301 ई. को

‘महारानी रंगादेवी’ के नेतृत्व में जौहर किया गया |

‘राजकुमरी देवल दे’ द्वारा जल जौहर किया गया |

केसरिया (हम्मीरदेव चौहान के द्वारा किया गया):- सर पर हरा रंग का सफा पहन कर युद्ध में लड़ते लड़ते वीरगती को प्राप्त होना |

अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा बाद में रतिपाल व रणमल की भी हत्या करा दी |

अलाउद्दीन खिलजी की इस विजय के बाद अमीर खुसरो द्वारा लिखा गया ‘आज कुफ़ का गढ़ इस्लाम का घर हो गया है |’

और इस जीत के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनापति उलुग खाँ को रणथम्भौर दुर्ग का प्रशासक नियुक्त कर दिया |

रणथ्म्भौर दुर्ग के बारे में | About Ranthambore Fort:-

निर्माता:- रणथम्मनदेव

श्रेणी:- गिरी पर्वत की

स्थिति:- सवाईमाधोपुर

पहाड़ियाँ:- रण व थम्ब

विशेषता:- “बाकि दुर्ग नंगे है एक मात्र बख्तरबंद दुर्ग यही है” ये वाक्य ‘अबुल फजल’ के द्वारा कहा गया |

प्रमुख स्मारक:-

1 सुपारी महल – यहाँ एक ही स्थान पर मंदिर, मस्जिद एंव गिरिजाघर (चर्च) स्थित है |

2 जौरा-भौरा – अन्न भण्डार

3 अधुरा स्वप्न – महाराणा संगा की पत्नी महारानी कर्मावती द्वारा इसे निर्मित कराया गया |

Post को Like और Social Media पर शेयर करे !

अजमेर / साभर के चौहान

राजस्थान की प्रमुख प्रागैतिहासिक सभ्यताएँ

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *